10/06/2026
प्रश्न :- अगर श्री राम का मंदिर तोड़ा गया तो इसका जिक्र तुलसीदास ने क्यो नही किया..??
प्रश्न वाजिब था..
खैर तलाश, रिसर्च प्रारम्भ हुआ और मिल भी गया....
पढ़ें तुलसीदास जी ने भी बाबरी मस्जिद का उल्लेख किया है!
सच ये है कि कई लोग तुलसीदास जी की सभी रचनाओं से अनभिज्ञ है और अज्ञानतावश ऐसी बातें करते हैं l
वस्तुतः रामचरित मानस के अलावा तुलसीदास जी ने कई अन्य ग्रंथो की भी रचना की है . तुलसीदास जी ने *तुलसी शतक* में इस घंटना का विस्तार से विवरण भी दिया है .
हमारे वामपंथी विचारको तथा इतिहासकारो ने ये भ्रम की स्थति उत्पन्न की, कि रामचरितमानस में ऐसी कोई घटना का वर्णन नही है .
*"तुलसी दोहा शतक "* का अर्थ इलाहाबाद हाई कोर्ट में प्रस्तुत किया है |
प्रत्येक दोहे का अर्थ उनके नीचे दिया गया है , ध्यान से पढ़ें |
*(1) मन्त्र उपनिषद ब्राह्मनहुँ बहु पुरान इतिहास ।*
*जवन जराये रोष भरि करि तुलसी परिहास ॥*
श्री तुलसीदास जी कहते हैं कि क्रोध से ओतप्रोत यवनों ने बहुत सारे मन्त्र (संहिता), उपनिषद, ब्राह्मणग्रन्थों (जो वेद के अंग होते हैं) तथा पुराण और इतिहास सम्बन्धी ग्रन्थों का उपहास करते हुये उन्हें जला दिया ।
*(2) सिखा सूत्र से हीन करि बल ते हिन्दू लोग ।*
*भमरि भगाये देश ते तुलसी कठिन कुजोग ॥*
श्री तुलसीदास जी कहते हैं कि ताकत से हिंदुओं की शिखा (चोटी) और यग्योपवीत से रहित करके उनको गृहविहीन कर अपने पैतृक देश से भगा दिया ।
*(3) बाबर बर्बर आइके कर लीन्हे करवाल ।*
*हने पचारि पचारि जन तुलसी काल कराल ॥*
श्री तुलसीदास जी कहते हैं कि हाँथ में तलवार लिये हुये बर्बर बाबर आया और लोगों को ललकार ललकार कर हत्या की । यह समय अत्यन्त भीषण था ।
*(4) सम्बत सर वसु बान नभ ग्रीष्म ऋतु अनुमानि ।*
*तुलसी अवधहिं जड़ जवन अनरथ किये अनखानि ॥*
(इस दोहा में ज्योतिषीय काल गणना में अंक दायें से बाईं ओर लिखे जाते थे, सर (शर) = 5, वसु = 8, बान (बाण) = 5, नभ = 1 अर्थात विक्रम सम्वत 1585 और विक्रम सम्वत में से 57 वर्ष घटा देने से ईस्वी सन 1528 आता है ।)
श्री तुलसीदास जी कहते हैं कि सम्वत् 1585 विक्रमी (सन 1528 ई) अनुमानतः ग्रीष्मकाल में जड़ यवनों अवध में वर्णनातीत अनर्थ किये । (वर्णन न करने योग्य) ।
*(5) राम जनम महि मंदरहिं, तोरि मसीत बनाय ।*
*जवहिं बहुत हिन्दू हते, तुलसी कीन्ही हाय ॥*
जन्मभूमि का मन्दिर नष्ट करके, उन्होंने एक मस्जिद बनाई । साथ ही तेज गति उन्होंने बहुत से हिंदुओं की हत्या की । इसे सोचकर तुलसीदास शोकाकुल हुये ।
*(6) दल्यो मीरबाकी अवध मन्दिर रामसमाज ।*
*तुलसी रोवत ह्रदय हति त्राहि त्राहि रघुराज॥*
मीर बाकी ने मन्दिर तथा रामसमाज (राम दरबार की मूर्तियों) को नष्ट किया । राम से रक्षा की याचना करते हुए विदीर्ण ह्रदय तुलसी रोये ।
*(7) राम जनम मन्दिर जहाँ तसत अवध के बीच ।*
*तुलसी रची मसीत तहँ मीरबाकी खाल नीच ॥*
तुलसीदास जी कहते हैं कि अयोध्या के मध्य जहाँ राममन्दिर था वहाँ नीच मीर बाकी ने मस्जिद बनाई ।
*(8)रामायन घरि घट जँह, श्रुति पुरान उपखान ।*
*तुलसी जवन अजान तँह, कइयों कुरान अज़ान ॥*
श्री तुलसीदास जी कहते है कि जहाँ रामायण, श्रुति, वेद, पुराण से सम्बंधित प्रवचन होते थे, घण्टे, घड़ियाल बजते थे, वहाँ अज्ञानी यवनों की कुरआन और अज़ान होने लगे।
गोस्वामी तुलसीदास जी की इस रचना में जन्मभूमि विध्वंस का विस्तृत रूप से वर्णन किया किया
है!
सभी से विनम्र निवेदन है कि सभी देशवासियों को अपने सभ्यता के स्वर्णिम युग के गौरवशाली अतीत के बारे में बताइये i
🇮🇳🇮🇳Jai Shri Krishna Jai Jai Shri Radhey🙏🏻🌹🙏🏻
02/06/2026
श्री सत गुरू देव नमहा ।
बोल जय कारा बोल मेरे श्री गुरू महाराज की जय ।
संसार में अननत काल से यह लेन देन की प्रथा चली आ रही है । गाँव , क़स्बों , शहर के बाज़ारों में तो लेन देन होता ही है । लेकिन आज का व्यक्ति मंदिर मठ आश्रमों में भी लेन देन पर भरोसा रख बहुसंख्यक लोगों की भीड़ अक्सर तीर्थ स्थानों , आश्रमों में दिखाई दिया करती है । लोग जाते हैं अपनी इच्छा पूर्ति के लिए । कोई विरले ही होते हैं जो काशी जाते हैं केवल भोलेनाथ के दर्शन के लिए । अयोध्या जाते हों श्री राम के दर्शन ,राम मंदिर में करने के लिए । मथुरा वृंदावन जा रहे हों श्री कृष्ण , श्री राधा जी के दर्शन मात्र ही । हर कोई अपनी इच्छित वस्तु , रिश्ते, पदवी , नौकरी , व्यापार की शुरुआत या उन्नति प्रगति के लिए ही या फिर किसी पाप के निवारण के लिए ही जाते दिख रहे हैं । वहाँ पर यह संसारी लोग कुछ ना कुछ माँगने के लिये जा रहें होते हैं । कोई मन के सुख शांति और कोई परिवार की बढ़ोतरी के लिए और कोई दुख निवारण के लिए अश्रु बहाता दिखाई दे रहा होता है । ग़ज़ब तो यह है कोई कोई तो यह भी कहता है प्रभु मेरा यह काम कर दो मैं फिर यह करूँगा । यह लेन देन ही तो है ।
तीन प्रकार के लोग होते हैं । एक जो लेन देन करते हैं । जैसे व्यापारी , दुकानदार , ठेलें वाले फल सब्ज़ी विक्रेता वग़ैरह वग़ैरह । दूसरे केवल लेने वाले । यह वह लोग जो चोरियाँ , डकैतियाँ या फिर छीना झपटी में ही लगे रहते हैं । तीसरे विरले ही होते हैं जो केवल देते ही हैं । जैसे साध या साध प्रवृत्ति के दानी लोग । सर्वश्रेष्ठ सत गुरू जी जो केवल देते ही देते हैं । संसार में देने वाले का ही गुणगान हुआ करता है । हमें भी देने वाला दानी बनने के लिए प्रयासरत रहना चाहिए । दान भिन्न भिन्न प्रकार के होते हैं । उनमें एक श्रम दान जिसमें कोई धेला पैसा खर्च नहीं होता है । कम से कम व्यक्ति को यह तो कर ही देना चाहिए ।
संसार में व्यक्ति शुद्ध पवित्र स्वच्छ मन से कुछ भी करे वह कार्य अच्छा परिणाम ही लायेगा ।
मन में कुछ और दिखावा कुछ और तो कैसे चल पायेगा । सफलता कैसे प्राप्त होगी ? अगर कहीं हो भी गई तो कब तक टिक पायेगी ।
कहते हैं ना ———
साँच को आँच नहीं ,
झूठ के पाँव नहीं ॥
जो भी करें सत्य पर डटे रहकर करें तो निश्चित सफलता लम्बे समय तक बनी रह सकती है और हम , हमारा परिवार , हमारा समाज तथा देश और धार्मिक संस्थानों में हमारी स्थिति सम्मान पूर्वक बनी रहेगी तथा धार्मिक पथ पर आध्यात्मिक उन्नति प्रगति भी होगी ।
हमें चाहिए कि हम अपनी अध्यात्मिक उन्नति प्रगति के लिए नित्य नियम से आरती पूजा सत्संग सेवा सिमरण ध्यान और स्वाध्याय करते हुए नाम जाप और निष्काम सेवा करते रहें । इसी से जीवन सार्थक हो पायेगा ।
तो मना तूँ भी अपनी आत्मिक उन्नति प्रगति के साथ साथ नित्य नियम से आरती पूजा सत्संग सेवा सिमरण ध्यान और स्वाध्याय करते हुए नाम जाप और निष्काम सेवा करता रह । सत गुरू जी भली करेंगे ।
जय गुरां दी । जय सच्चिदानंद जी ।
स्वस्थ रहिए सुरक्षित रहिए और अपनी आत्मिक उन्नति प्रगति करते रहिए ।
ऊं नमो शिवाए ।
जय शिव शंकर ।
हर हर महादेव ।
जय हो भोले नाथ की ।
सत्यम शिवम् सुंदरम् ।
सत्य ही शिव है , शिव ही सुंदर है ।
04/01/2026
।।हरे कृष्ण।।
माघ का पवित्र मास प्रारम्भ हो गया है इस मास में जो भी व्यक्ति अन्नदान करता है शास्त्र कहते है की उसके 21 पीढ़ीयों को भगवान के निज धाम (गोलोक धाम) की प्राप्ति होती है। 🛕🙏🙏
04/01/2026
।।जय श्रीकृष्ण।।
भगवान श्रीराधा माधव का दिव्य, मनोहर व दुर्लभ श्रृंगार दर्शन।🛕🌷🌷🌷🌷🌷🌷🛕🙏🙏
03/01/2026
*ना गोली, ना तलवार* केवल आर्थिक बहिष्कार
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• जो काम अमेरिका फ्रांस भारत रूस कोई नहीं कर पाया वो बर्मा के "विराथू" जी ने कर दिखाया..
• आज बर्मा में करोडो रुपये के बने मस्जिद वीरान पड़े हैं, क्यूंकि आज देश मे मुसलमान देखने को नहीं है जो की वहां जाए और देखे मस्जिदों को और जो है वहां, उसकी तबीयत से ठुकाई हो रही है.!
• • "विराथु" जिसके बाद ही लोग जान पाए कि ये महान इंसान कौन है.? और इन्होने क्या कर डाला है.?
• "आसीन विराथु" - वो भगवा संत जिसके नाम से काँपते हैं मुसलमान.!
• • बर्मा के बौद्ध गुरु "विराथु जी" ने आखिर किस तरीके से मुस्लिम को भगाया या कमज़ोर किया समझो.!
• • जैसे मुसलमानों का '७८६' का नंबर लकी माना जाता है वैसे ही विराथु ने "९६९" का नंबर निकाला और उन्होंने पुरे देश के लोगों से आह्वान किया कि जो भी राष्ट्रभक्त बौद्ध है वो इस स्टीकर को अपने अपनी जगह पर लगायें.!
• • इसके बाद हर किसी ने अपनी व्यवसाय पर, इसको लगाना शुरू किया, "विराथु" का सन्देश स्पष्ट था कि हर (हम) बौद्ध अपना सारा व्यापार वहीँ करेंगे जहां ये स्टीकर लगा होगा.
• • किसी को टैक्सी में चढ़ना हो तो उसी टैक्सी में चढ़ेंगे जिसके ऊपर ये स्टीकर होगा. उसी रेस्टोरेंट में खायेंगे जहां ये स्टीकर होगा...!
• • उन्होंने ये भी कहा कि हो सकता है ऐसी हालत में मुस्लिम सऊदी से आये पैसों के दम पर अपने माल को कम कीमत पर बेच कर आपको आकर्षित करे लेकिन आप ध्यान रखना.
• • आप दो पैसा ज्यादा देना. और सोचना कि आपने अपने देश के लिए पैसा लगाया है...
• • दो पैसे कम में खरीद कर मातृभूमि से गद्दारी मत करना "वो आपके पैसे आपको ही मिटाने में लगाते हैं मुर्खता मत करना.!"
• • दोस्तों हालत ये हो गए कि "मुस्लिम के व्यापार ठप्प पड़ गए, मुस्लिम इतने आतंकित हुए कि इस स्टीकर लगी टैक्सी को चढ़ना तो दूर, किनारे से कन्नी काटने लगे, पुरे देश में मुसलमानों के होश ठिकाने आ गए, और फिर ये स्टीकर एक तरह से देशभक्ति का प्रमाण बन गया, उनके जिहाद का जवाब बन गया, और इस अनोखे आईडिया का प्रभाव आप देख सकते हैं कि आज बर्मा से मुस्लिम भाग चुके हैं.!"
• • "विराथु" वो संत हैं जिन्होंने आतंक के खिलाफ पूरे म्यांमार को खड़ा कर दिया गया और फिर वहां से लोगों ने अवैध मुस्लिमों को खदेड़ डाला.!
• • लोग जो भगवान बुद्ध की बातों पर अमल करते आ रहे थे उन लोगों ने देश की रक्षा के लिए बुद्ध की बातों को छोड़ संत "विराथु" की बातों पर अमल किया.!
• • "विराथु" ने कहा, *"चाहे आप कितने भी दयावान और शांतिप्रिय हो पर आप एक पागल कुत्ते के साथ नहीं सो सकते अन्यथा आपकी शांति वहां कोई काम नहीं आएगी और आप बर्बरता से ख़त्म कर दिए जाओगे" उन्होंने कहा, "शांति स्थापित करने के लिए हथियार उठाना होगा, शांति के लिए युद्ध जरुरी है।" ये सारी बातें "विराथु" ने गीता से ली और फिर आतंक की बीमारी झेल रहे म्यांमार के लोग एकजुट हो गए वो "विराथु" के लिए जान लेने और देने को तैयार हो गए और पूरे म्यांमार से अवैध मुसलमानो को खदेड़ा जाने लगा.!"*
• • म्यांमार में हुए कई सर्वेक्षणों के बाद ये प्रमाणित हो चुका है कि जनता एवं बौद्ध भिक्षु विराथु" के साथ है। "विराथु" का स्वयं भी कहना है कि वह न तो घृणा फैलाने में विश्वास रखते हैं और न हिंसा के समर्थक हैं। लेकिन हम कब तक मौन रहकर सारी हिंसा और अत्याचार को झेलते रह सकते हैं.?
• • इसलिए वह अब पूरे देश में घूम-घूम कर भिक्षुओं तथा सामान्यजनों को उपदेश दे रहे हैं कि "यदि हम आज कमजोर पड़े, तो अपने ही देश में हम शरणार्थी हो जाएंगे.।
• • *आइये हम सब हिंदू भी इस क्रिया को अपनायें और सिर्फ उसी का साथ दें जहाँ 'सनातन' चिन्ह लगा हो।*
• जेहादी मुसलमानों का बहिष्कार, "हर स्तर पर हो"
02/01/2026
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*💧02 जनवरी 2026💧*
*٥٥٥٥٥٥٥٥٥٥٥٥٥٥٥٥٥٥٥٥٥٥٥٥٥٥٥٥٥٥٥*
*🐅सिंह अगर चट्टान पर बैठ जाए तो वह चट्टान भी सिंहासन कहलाती है,🐅*
*🪑इसीलिए सिंहासन का मोह ना रखते हुए खुद सिंह बनो🪑* ,
*🪭आप जहां पर बैठेंगे वहां सिंहासन🪑 बन जाएगा ll🪭*
*🎉 सुप्रभात जी🎉*
*🎊 आपका दिन शुभ व मंगलमय हो जी 🎊*
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01/01/2026
आपको और आपके परिवार को मेरे और मेरे परिवार की तरफ से नव वर्ष 2026 की हार्दिक हार्दिक शुभकामनाएं इन्हीं शुभकामनाओं के साथ पुनः नव वर्ष की हार्दिक हार्दिक शुभकामनाएं .
🌹🌹Happy New year 2026🌹🌹
01/01/2026
*🌼🟧 अमृतकथा प्रसंग क्र 1936 🟧🌼*
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*🪷🕉️ क्या हम पूर्ण सुखी है ? 🕉️🪷*
पुराने समय में एक राजा था। राजा के पास सभी सुख सुविधाएं और असंख्य सेवक सेविकाएं हर समय उनकी सेवा उपलब्ध रहते थे। उन्हें किसी चीज की कमी नहीं थी। फिर भी राजा उसके जीवन के सुखी नहीं था। क्योंकि वह अपने स्वास्थ्य को लेकर काफी परेशान रहता था।वे सदा बीमारियों से घिरे रहते थे।
राजा का उपचार सभी बड़े-बड़े वैद्यों द्वारा किया गया परंतु राजा को स्वस्थ नहीं हो सके। समय के साथ राजा की बीमारी बढ़ती जा रही थी। अच्छे राजा की बढ़ती बीमारी से राज दरबार चिंतित हो गया। राजा की बीमारी दूर करने के लिए दरबारियों द्वारा नगर में ऐलान करवा दिया गया कि जो भी राजा स्वास्थ्य ठीक करेगा उसे असंख्य स्वर्ण मुहरे दी जाएगी।
यह सुनकर एक वृद्ध राजा का इलाज करने राजा के महल में गया। वृद्ध ने राजा के पास आकर कहा:- ‘महाराज, आप आज्ञा दे तो आपकी बीमारी का इलाज मैं कर सकता हूं।’ राजा की आज्ञा पाकर वह बोला:- ‘आप किसी पूर्ण सुखी मनुष्य के वस्त्र पहनिए आप अवश्य स्वस्थ और सुखी हो जाएंगे।’
वृद्ध की बात सुनकर राजा के सभी मंत्री और सेवक जोर जोर से हंसने लगे। इस पर वृद्ध ने कहा:- ‘महाराज आपने सारे उपचार करके देख लिए है, यह भी करके देखिए आप अवश्य स्वस्थ हो जाएंगे।’ राजा ने उसकी बात से सहमत होकर के सेवकों को सुखी मनुष्य की खोज में राज्य की चारों दिशाओं में भेज दिया। परंतु उन्हें कोई पूर्ण सुखी मनुष्य नहीं मिला। प्रजा में सभी को किसी न किसी बात का दुख था।
अब राजा स्वयं सुखी मनुष्य की खोज में निकल पड़े। अत्यंत गर्मी के दिन होने से राजा का बुरा हाल हो गया और वह एक पेड़ की छाया में विश्राम हेतु रुका। तभी राजा को एक मजदूर इतनी गर्मी में मजदूरी करता दिखाई दिया।राजा ने उससे पूछा:- ‘क्या, आप पूर्ण सुखी हो ?’ मजदूर खुशी खुशी और सहज भाव से बोला:- भगवान की कृपा से मैं पूर्ण सुखी हूं।
यह सुनते ही राजा भी अति प्रसन्न हुआ। उसने मजदूर को ऊपर से नीचे तक देखा तो मजदूर ने सिर्फ धोती पहनी थी और वह गाढ़ी मेहनत से पूरा पसीने से तर है राजा यह देखकर समझ गया कि श्रम करने से ही एक आम मजदूर भी सुखी है और राजा कोई श्रम नहीं करने की वजह से बीमारी से घिरे रहते हैं।
राजा ने लौटकर उस वृद्ध का उपकार मान उसे असंख्य स्वर्ण मुद्राएं दी। अब राजा स्वयं आराम और आलस्य छोड़कर श्रम करने लगे। परिश्रम से कुछ ही दिनों में राजा पूर्ण स्वस्थ और सुखी हो गए।
कथा का सार यही है कि आज हम भौतिक सुख सुविधाओं के इतने आदि हो गए हैं कि हमारे शरीर की रोगों से लड़ने की शक्ति क्षीण हो जा रही है। इससे हम जल्द ही बीमारी की गिरफ्त में आ जाते हैं। *अत:* स्वस्थ और सुखी जीवन का रहस्य यही है कि थोड़ा बहुत शारीरिक परिश्रम जैसे योगा, ध्यान, भ्रमण आदि अवश्य करें।